Monday, February 23, 2015

राशनकार्ड से लेकर जाति प्रमाणपत्र तक ऑनलाइन

अगर केंद्र के सूचना प्रौद्योगिक मंत्रालय के दावे को सही मानें तो दो-ढाई साल भर के भीतर देश के सभी 626 जिलों में पेंशन, राशन कार्ड, दीवानी अदालतों के मुकदमे, जाति व विवाह के प्रमाण-पत्र, आय और रोजगार प्रमाण पत्र का सारा कामकाज ऑनलाइन हो जाएगा। ऐसी छह से दस सेवाएं हैं जिनका सारा लेखा-जोखा डिजिटल रूप में रखा किया जाएगा। मंत्रालय यह काम ई-डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट के तहत करवाएगा और यह प्रोजेक्ट चार-पांच महीनों में शुरू कर दिया जाएगा।
हर जिला प्रशासन को 18 महीने दिए जाएंगे जिसमें उसे सारे पुराने रिकॉर्ड और प्रमाण पत्रों को डिजिटल रूप से एक जगह ला देना होगा ताकि उसे ऑनलाइन पाया जा सके। राष्ट्रीय स्तर पर इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 2500 करोड़ रुपए है। इसका 75 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार देगी और बाकी 25 फीसदी खर्च राज्यों सरकारों को उठाना होगा। ई-डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट देश भर में ई-गवर्नेंस लाने के लिए बनाए गए 27 प्रोजेक्टों में शामिल है। नोट करने लायक बात यह है कि इसका अनुमानित खर्च नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में चल रहे यूनीक आईडेंडिटीफिकेशन (यूआईडी) प्रोजेक्ट, आधार के लिए आवंटित 1900 करोड़ रुपए से ज्यादा है।
तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र के कुछ जिलों में इस प्रोजेक्ट पर अमल शुरू हो चुका है। सरकार इस प्रोजेक्ट की खातिर हार्डवेयर व सॉफ्टवेयर जुटाने के लिए विप्रो, 3आई इनफोटेक और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज जैसी कंपनियों की मदद ले रही है। आईटी कंपनियों के शीर्ष संगठन नैस्कॉम का आकलन है कि इस प्रोजेक्ट से अगले कुछ सालों में भारतीय कंपनियों को 9 अरब डॉलर (लगभग 41,760 करोड़ रुपए) का धंधा मिलेगा।

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